शनिवार, 24 जनवरी 2026

घर लौट कर आना,,तुम्हारे करीब

मै कोलाहल और शोर छोड़ कर आया हु
दुनियावी हर मोह छोड़ कर आया हु
हर उलझन उपापोह छोड़ कर आया हु
तुम बस थोड़ा सा भात पसा लेना
कांसे की थाली पे भाजी चौलाई की
हम कौर बना बना कर खा लेंगे
यूं साथ रहा तो 


शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

प्रकाशित

मै प्रकाशित होने खातिर नहीं लिखता
मै प्रकाशित होने को लिखता हु ,,खुद से