बुधवार, 4 मार्च 2015

पीरा के फसल

हपट हपट के रेंगे ह़ो,,,
गारी संग रोटी खायेव ह़ो ,,
जिनगी के अरचन बांचे  हे ,,
तो मन्हू कन्हा सिराय ह़ो ,,

मिहनत के बादर नै बरसिस,,,
माथा ले  पानी पलोय ह़ो
किस्मत  के छाती जोते ह़ो ,,,
पीरा के फसल उगायेव ह़ो ,,

अनुभव

सोमवार, 2 मार्च 2015

बजट

होली माँ हरिया गया
घाम घलो सिरा गया
बजट में अस तपई तपा
मानसून लहुट के आ गया
महंगाई  भोमरा कस जरोता है
सर्विस टेक्स घलो पदोता है
भोकवा पब्लिक काला जाने
बने दिन अइसने होता है
अनुभव

गुरुवार, 29 जनवरी 2015

बिकाश आवथ हे


विकास  vs बिकाश

बिकाश आवथ हे ग ,,
बिकाश आवथ हे ,,
लाल बत्ती गाड़ी ,,,
तेमा गोंजाय हे अधिकारी ,,
धुर्रा उडा गिस ,,
तो दुकालू खासत हे ,,
काम के गारंटी ,,औ
आनाज के गारंटी ,,औ
लइका औउ पिचका के शिक्षा के गारंटी ,,
गारंटी के नारा ऊपर  ,,
खेमिन छेना थापत हे ,,
खालेह के खार माँ ,,
लोहा के करखाना,,
बेच दिस खेत ला ,,
उठा लिस  बयाना ,,
एक रूपया चाउर खवैया ,,
येदे होंडा बिसावथ हे ,,
फेक्ट्री माँ काम कर ,,
अस्सी रूपया रोजी ,,
हवे बिक्कट मिहनत फेर ,,
संझकेरहा के जुगाड़ हो जही,,
गोवा के चेपटी  पी के ,,
जम्मो गाव नाचथ हे ,,,गा
बिकाश आवथ हे ,,
अनुभव

शुक्रवार, 23 जनवरी 2015

ओबामा के बरात

बराक के बरात
बराक आवत हे या फेर बरात आवत हे
मोंगरा माला धरे मोदी पर्घनावत हे
मोरया शेरेटन में सजे हे जनवासा
ऍफ़ बी आई कोपरा में पनवार खावत हे
अस के इंतजाम के छूट जाय प्राण
दाइज में बनारसी साडी जोरावत हे
बड़े घर ले रिश्ता में इही रिथे चकल्लस
घराती नाचत हे औ बराती नचवावत हे
अनुभव

शुक्रवार, 9 जनवरी 2015

सिरपुर

सिरपुर

एक शहर जो सदियो पहले
माटी ओढ़ के सोया था
एक शहर जो इतिहास गर्भ में
विस्मृत हो कर खोया था
लो जाग उठा
महानदी का जल छीच
उठ खडे हुऐ
मन्दिर विहार
पुनः उसी निर्वाण भाव से
फिर मुसका दिए तथागत
ज्यो जल छूटा जलोहरि से
झनझना उठी घण्टियाँ
शिव देवालयों कि
सिरपुर,, यथावत
सम्बोधि का आसन् लेकर
यूँ बैठ गया है

अनुभव शर्मा



शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

संगठन

इस विजय अभियान पर संघटन को समर्पित है मेरी ये पंक्तिया.....

"संगठन के संग से "
सहयोग और उमंग से
अर्श के उत्कर्ष को
जब उठ गये संघर्ष को
लक्छ वांछित मिल गया
हर हृदय ज्यो खिल गया
नई दिशा  अभी शेष है
"जो मन्जता रहे वही मजिस्ट्रेट है"
अनुभव

रविवार, 21 सितंबर 2014

चीन

यहा बड़ चीन
घेरी बेरी मंगैया कस मांगथे जमीन
62 ल भुला जा अब हमू रांधत हन चोउमिन
अब हमरो तीर हवे अग्नि औ पृथ्वी
खोचाय सबमरीन
ता फेर धंधा पानी करबे
तो गोठिया
नै ता
छेरी लेडी बीन