शनिवार, 14 मार्च 2026

मृत्यु आने न देना

हे देव,,अब मृत्यु आने न देना
जीवन रहे सदा निरंतर
कभी मृदा होकर सो जाऊ
कभी लहर उफन बह जाऊ
कभी फूल कभी तितली सा बिखरू 
कभी पतझड़ बन कर बिछ जाऊं
मुझे अहसास सा अमृत देकर
मिटा भी देना बना भी देना
मेधा देकर मानुष जना 
पर अपना अस्तित्व गंवाया मैने
अब जब फिर रच जाऊंगा
विभग,,, वृक्ष सा स्मृति लेकर
तब सबके साथ चलूंगा
निर्भीक होकर निश्चिंत होकर


सोमवार, 2 मार्च 2026

पाटा टू पाटा

इस पाटे से उस पाटे तक,,
किस्सा वही पुराना था
कहीं मेरा खंजर लाल हुआ
कही तेरा चूतड जाना था

उम्मीदों की तकरीरें थी
मै भी दादा बन जाऊंगा
संघर्षों की इस तपोभूमि में
थाने का डंडा खाना था