रविवार, 9 अगस्त 2026

वक्त धरती के चक्कर के साथ चलता है,,,हाथ में बंधी घड़ी भी,,,फिर कलेंडर के पत्ते पलटे जाते है आखिरकार पूरा कलेंडर बदल जाता है,,,वक्त के जैसे,,पर कई घरों में भूख नहीं बदलती,,,वो कायम रहती है वैसे ही
                कारखाने की छत से गिरधर गिर गया ,,,तुरंत साँसे रुक गई
सर की चोट थी ,,,मुर्दा शरीर एम्बुलेंस में रखते हुए ही सब जान गए कि उसमें जान नहीं रही,,, भीड़ और नारे लोकतंत्र की पहली सीख है ,,,सारे मजदूर एक स्वर में फैक्ट्री की ईंट से ईंट बजा रहे थे,,,करेंट लगने से मरा ,,, मुवाजा देना होगा,,,प्रबंधन और प्रशासन पहले समझाइश देता है ,,,मुवावजे पर विचार करता है ,, पुलिस भीड़ को संभालती है कभी भीड़ भी पुलिस को संभालती है,,,लोकतंत्र आगे बढ़ता है जब राजनेता आते है,, मरे गिरधर के बचे परिवार से मिलने,,,चाय भी पड़ोस की झोपड़ी से आती है,, क्यूँ की रसोई खाली है,,,गिरधर भी खाली पेट फैक्ट्री गया था,,,नई नौकरी 

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