शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

प्रणाम

स्वयम साक्छात,,,शिव शम्भू

चाचा ,,,प्रणाम
जय हो ,,,,चौक में समाधिस्थ चाचा की  आवाज गूंज गई,,  बुलेट के फ़टे सायलेंसर सी ,,हाथो का इशारा,,,जिसका सांकेतिक अर्थ था,,बैठो,, चूतिया कही के,,,दीवान चाचा जैसे पहुचे धर्मज्ञ के समक्छ पूरा मोहल्ला ही अज्ञान की लद्दी में लथपथ था,, सीधे कहे तो ,,चूतिया कंही के,,,
               चाचा आपातकाल के दौर की छात्र राजनीति से छनी ,,बसियाई चायपत्ती थे,,जो अब धर्म और दर्शन की चाय में महक रही थी,,,चाय डबक
पड़ी,,, देखो !! सामने स्वयम साक्छात,,,प्रणाम करो,,मेरी नजर पड़ी,, समाने खड़े पूछ को खुले जबड़े से खुजाते कुत्ते पर ,,सोचा स्वान पूजा की कोई गुप्त तांत्रिक परम्परा होगी ,,तो हाथ जोड़ने में ही खैर है,, मोहल्ले में चाचा के प्रतिरोध  पश्चात लोकप्रिय गलियों के उच्चारण और भयंकर चपाटे के किस्से कुख्यात थे,, इसलिए,,प्रणाम करना ही उचित था,,
            ,चाचा ने अपनी बोटराई आँखे तरेरी,,क्या,,मैं कौतुहल से भरा कुत्ते की ओर उन्मुख हुआ,,,बोले,,बेवकूफ,,उधर नही ,,वँहा,,,मन में प्रश्न उठा कहाँ,,, अबके सामने  बने संडास को आँखे चली गई ,,लगा शायद स्वच्छ भारत अभियान की सफलता का अभिवादन करवा रहे हो,,चाचा फिर गुर्राए,,प्रणाम करो,,मैंने फिर प्रणाम किया,,,स्वयम साक्छात,,,चाचा श्लोक बुदबुदा रहे थे,,और ,,,प्रणाम करो,,पिछले आधे घण्टे मैं बीस पच्चीस मिस्गाइडेड प्रणाम फ़ेंक चुका था,,निशाने पर थे कल्लू का चाय ठेला  ,,संडास के पीछे का बरगद या उसमें बैठा सफेद उल्लू  और न जाने क्या क्या ,,फिर चाचा का श्लोक भी सिरा गया,,,,बोले ध्यान से देखो,, दिखे स्वयम साक्छात,,,
मैंने सर अचरज में हिला दिया,,चाचा गरजे ,,बेवकूफ नितो,,वो देखो सामने ,,इस बार इशारा सीधे आसमान की ओर था,,हशिऐ जैसा चाँद मुस्कुरा रहा था ,,वो क्या है,,मैंने कहा चाँद!!!! चाँद क्या ,,,मैंने कहा पृथ्वी का उपग्रह,,,अब चाचा बिफर गये ,,बेवकूफफ़फ़फ़फ़फ़ तुम्हारे विज्ञानं की तो,, उपगरह ,,, भोले बाबा के माथे में सजा दिव्य स्वरूप नही दिखाई देता,,स्वयम साक्छात,,,मुझे तत्काल ज्ञान प्राप्ति हुई,,और औचक ही चन्द्रमा के साथ  प्रभु शंकर की हम दो हमारे दो फैमली ,,मय नंदी की कल्पना साकार हुई ,,,हाथ जोड़ कर फिर प्रणाम किया ,,ये प्रश्न ध्यान,,या विज्ञानं का नही अपितु शिव प्रसाद ""भांग"" का था,,जिसकी तीन चार  गोलियां गटक कर ,,चाचा को महाशिव ने माथे में चाँद धरे दिव्य दर्शन दिये थे, ,,स्वयम साक्छात,,,,

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2017

पाबंदियां पैग पे प्रपोजित है
डिसपोजल तेरे हिस्से

बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

टेटकी टूरी

टेटकी हे टूरी ,,
जीन्स टाइट लेवाइस
बग्ग बग्ग चिमके,,,
छुटे सैटेलाइट,,
फट ले सिग्नल मारे,,,

करारी हे कन्हिया ,,
तेमा बेल्ट फनफनिया
गदर तोर बण्डी
जरत ले  घमंडीन
डियो ममहावत हे,,

जमाना के झांकी

रविवार, 12 फ़रवरी 2017


सत्ता है अलबत्ता
मीठी मधु का छत्ता
जिसे चुना वो तो रसपान करेगा
चुनने वाले
सेवा का मौका

बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

धन बरसेगा

इकानामिक्स टाइम्स में पढ़ा समारू
धन बरसेगा,,,
खेत बिछा कर बैठ गया वो
धन बरसेगा,,,
धान ऊगा कर,, सोंच रहा था
धन बरसेगा,,,?
बादल गरजे,,बूंदाबांदी कर गुजर गए
मेडों को थोड़ा भिगा कर,, शहर गऐ
बादल देख कर चिढ़ता है,,
समारू ,,अब फिर से देशबन्धु पढता है!!!
समझ गया है
झँट बरसेगा

सोमवार, 19 दिसंबर 2016

कार्यपालक दंडाधिकारी या डंडाधिकारी ,,माने दण्ड देते हुए कार्य का पालन करवाने वाला अधिकारी,, दंडा अधिकारी अब्राहम लिंकन की लोकतंत्र की परिभाषा को मायने प्रदान करता है यानि जनता को कंही भी,, कैसे भी और कितना भी दिया जाने वाला दण्ड,,,दंडाधिकारी मल्टीबेरल मिसाइल की तरह होता है यानि एक बार छूटा तो कई लक्छ ध्वस्त,जंहा ला एंड ऑर्डर पर खतरा दंडाअधिकारी को महसूस हुआ, ,वो लॉ को,,,,च ला,,,,कर देता है,,और एक साथ आंसू गैस ,,डंडा और गोली चलने लगती है ,,,इसे कहते है ऑर्डर,,,
            अधिकारी के ऑर्डर मात्र से 144 की धारा बहने लगती है,,,डंडा खाकर  गिरे हुए एम्बुलेंस में जाते है ,,और घायल धारा 151 से होते हुए जेल की गाडी में
,,अस्पताल में घायल व्यक्ति भी डंडाधिकारी के भय में अपना शव पंचनामा करवा लेते है वंही,,, मुर्दे ,,मृत्यु पश्चात कथन देने लगते है,,,अंततः अधिकारी कई फौती नामान्तरण करके ही वापस आता है,,इस तरह दण्डा धिकारी ,,साक्छात चलता फिरता जनसमस्या निवारण शिविर है,,जो जन ,का ,गन से निवारण करते चलता है,,,

बुधवार, 14 दिसंबर 2016

किस्मत ने जिस दिन नौकरी थमाई
खुद के कोर्ट में,,मेरा इश्तगासा ले आई
जमानत खुद का ,,खुद को मंजूर नही
कैद रहो अनुभव,,अभी दूर है रिहाई!