गोस्वामी तुलसी दास रचित श्रीरामचरितमानस के 'श्री रुद्राष्टकम्' श्लोक में भगवान शिव के नीलकंठ रूप में वर्णन मिलता है
चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्।
यही कारण है कि दशहरा पर्व में नीलकंठ पक्षी के दर्शन का माहात्म्य साक्षात महाशिव के दर्शन के समान है,,श्रुति है कि श्री राम जब रावण वध हेतु जब प्रस्थान कर रहे थे तब उनकी दाहिनी ओर से आवाज लगाते यह परिन्दा उड़ा,, और रावण की पराजय हुई,,एक पक्षी प्रेमी के रूप में मैने अपने परिवार में यह परम्परा बनाई है कि सुबह सुबह हम नीलकंठ की खोज में निकलते है,,
आज सुबह से हम शिव रूपी परिंदे की खोज में भटकते हुए खारुन नदी के किनारे किनारे चल निकले
इंडियन रोलर के नाम से जाने जाना वाला यह परिन्दा खेतों नदियों के आस पास कीट पकड़ते मिल ही जाता है ,,लेकिन जिस दिन उसका माहात्म्य हो वहां बिना प्रयत्नों के ये कैसे मिलता,,खोजते हुए हमें लगभग एक से लेकिन भिन्न वाइट थ्रोटेड किंगफिशर के कई जोड़े मिले पर नीलकंठ नहीं, यहां तक भगवान शिव के प्रिय सफेद कुमुद का भी दर्शन हो गया , इस यात्रा में आगे बढ़ते हम देवबलोदा के प्राचीन शिव मंदिर तक पहुंच गए ,,जहां बारहवीं सदी से महाशिव आसान जमाये है,, आखिर कार लौटते हुए ही नीलकंठ ने दर्शन दिया एक नहीं चार पांच,,,यात्रा धन्य हुई,,, अब आप बताइए कौन सा परिंदा नील कंठ है
सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
नीलकंठ
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