फिजा में घुला है ज़हर
अब श्वास लेना भी निषेध है
जांच जारी है ,,तब तक;
मिलावट के लिए खेद है
अनुभव
पी एस सी पास कर सोंचा ,,
अब साहब बनूँगा ,
,साला जिन्न बन गया,,,अब
दिन और रात घिस रहा हु
कभी आदेश पे कभी निर्देश पे
कभी मांगो की मिक्सी में पिस रहा हु
तमाम काम है की होते नही तमाम
न कोई सुबह अपनी न कोई शाम
फिर भी जो कभी कहा की त्रस्त हु
कहते है ,,बहाने बनाता हु मैं भ्रष्ट हु
न परिवार खुश न पूरा इलाका
यही रटता जा रहा है अनुभव
क्या हुक्म है मेरे आका,,,
शाह ए इस्तकबाल में खलल न हो पाए
हुक्म है सभी स्याह ऐनके हटाई जाए
नजरो की वफ़ा झुक झुक के पेश करें
ख्याल रहे ,हालते मुल्क न बेपरदा हो जाए
अनुभव
पूरा नाम ,,,विजय दीनानाथ,,एक किसान
दिनकर राव टोपी सम्भाल
हवा गरेर करत हे
खेत खार के जवूहर होंगे
कि के,, राजधानी के छानही झरत हे
कल करखाना के धूँगीया ले
चूल्हा के रोटी जरत हे
जी डी पी के सूतली में झूल के
निकलत हे जेकर प्रान
पूरा नाम समारू पिता बुधारू
पेशा,,,,, एक किसान
अनुभव
नेता जी बोले
खेत मर गए
फ़स्ल मर गई
किसान मर गया
""""
तभी उनके सामने
पेड़ से लटक कर
एक इंसान मर गया
""""
और वो पूछते है
किस दल का है?????
सुन कर लगा कि
हिन्दुस्तान मर गया
अनुभव
दिन गए जब ओहदे के ,जलाल थे अनुभव
अब तो यूँ नोकरी ,करते नही बचाते है
पेशानी के पशीने से तेरा वेतन निचुड़ता है
और वो पूछते है साहब कितना कमाते है
अनुभव
दंड का अरण्य ,,, बस्तर
दंड भोगते उस अरण्य में ,,
फिर गरजे बारूदी मेघ
रक्त सिक्त वो गीली माटी
जले मांस सी ममहा गई
किसी क्रान्ति की भ्रान्ति में
माओ के नारे टर्राते
छिपे टोड इक इक कर उफ़्ले,,
साल सगोंन तनो पे लपलपाती
जिव्हा विकास की
लार टपकाती,,ठिठक गई
सभ्यता का इंद्रधनुष बन कर
लटक गई,, कोने में,
वो खेतो में बीज छिड़कता ,,
अधनंगा बन्दर सोंचता रहा
जाने कैसी फ़स्ल उगेगी
किसकी कितनी भूख मिटेगी ,
ऐसे अनबुझे से उत्तर खोजता रहा,,,
अनुभव