हाथी देखा बड़ा जानवर,,
कैसे पूंछ हिलाता है,,
जंगल मे प्यासा रहता है
भाग शहर को आता है
हे हाथी!
घेरी बेरी यू
झन आने का कष्ट करो
थोड़ा भी जो , है जंगल मे
उसमे ही एडजस्ट करो
अनुभव
फागुन तिहार ये दारी
किरिया परो संगवारी
लकर लकर,,डिजिटल करबो
औ सरर सरर ,,आधारी
बांचे बिकट उधारी बन्धु
बांचे बिकट,,उधारी
तिल्दा आघु,,रायपुर आघु
पाछू ,,अभनपुर सवारी
किंजरन दे भुइँया के पहिया
इज्जत के भाव है भारी
चपक चपक के की बोर्ड ल
देखा अपन दमदारी,,
जय छतीसगढ़ महतारी,,
होली स्पेशल
लोकतंत्र के लकड़बग्घे
शिकार नही करते,
इत्मीनान से जूठन खाते है
मानसून मैदानों को हरियाती है
हिरण तब चरने आते है
शेरों के झुंड
सर सर सर सर,,,,
,, था अफसर ,
झुका कर सर,,,
मोबाइल पर ,,
रटता रहता,,
अक्सर,,
सर सर सर सर,,,,
,,,सुन कर,,पल भर
सहम जाता दफ्तर
नया आदेश हे !ईश्वर
,,,मगर,,,
,,,,फिर गूंज उठता स्वर
,,,, हर इक मेज टेबल पर
,,,,,,सर सर सर सर,,,,,
अनुभव,,,