शनिवार, 28 अप्रैल 2018

हाथी देखा बड़ा जानवर,,
कैसे पूंछ हिलाता है,,
जंगल मे प्यासा रहता है
भाग शहर को आता है
हे हाथी!
घेरी बेरी यू
झन आने का कष्ट करो
थोड़ा भी जो , है जंगल मे
उसमे ही एडजस्ट करो

अनुभव

बुधवार, 7 मार्च 2018

खाँसते कुत्तों की तस्वीर छाप देता है
वो अखबार रोज ताजी खबर देता है

गुरुवार, 1 मार्च 2018

फागुन

फागुन तिहार ये दारी
किरिया परो संगवारी
लकर लकर,,डिजिटल करबो
औ सरर सरर ,,आधारी
बांचे बिकट उधारी बन्धु
बांचे बिकट,,उधारी
तिल्दा आघु,,रायपुर आघु
पाछू ,,अभनपुर सवारी
किंजरन दे भुइँया के पहिया
इज्जत के भाव है भारी
चपक चपक के की बोर्ड ल
देखा अपन दमदारी,,
जय छतीसगढ़ महतारी,,

होली स्पेशल

शुक्रवार, 8 दिसंबर 2017

गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017

लोकतंत्र के लकड़ बग्घे

लोकतंत्र के लकड़बग्घे
शिकार नही करते,
इत्मीनान से जूठन खाते है
मानसून मैदानों को हरियाती है
हिरण तब चरने आते है
शेरों के झुंड

सोमवार, 4 सितंबर 2017

कौवा हँस रहा था
बन्द मुर्गे की हालत पे
मुर्ग मुसलम पकना था
आज रात की दावत में
मुर्गा होकर गम्भीर कुड़कुड़या

रविवार, 6 अगस्त 2017

सर सर सर सर

सर सर सर सर,,,,

,, था अफसर ,
   झुका कर सर,,,
   मोबाइल पर ,,
   रटता रहता,,
   अक्सर,,
   सर सर सर सर,,,,
,,,सुन कर,,पल भर
   सहम जाता दफ्तर
    नया आदेश हे !ईश्वर
,,,मगर,,,
,,,,फिर गूंज उठता स्वर
,,,, हर इक मेज टेबल पर
,,,,,,सर सर सर सर,,,,,

अनुभव,,,