यहा बड़ चीन
घेरी बेरी मंगैया कस मांगथे जमीन
62 ल भुला जा अब हमू रांधत हन चोउमिन
अब हमरो तीर हवे अग्नि औ पृथ्वी
खोचाय सबमरीन
ता फेर धंधा पानी करबे
तो गोठिया
नै ता
छेरी लेडी बीन
रविवार, 21 सितंबर 2014
चीन
सोमवार, 10 दिसंबर 2012
अपोजिसन मने बिरोध ,,
संसद भीतरी कुकुर कटैया,,
अस माते कुहूराम हे ,,
हाँथ हा सबो के कालर तिरत ,,
कमल के लग गिस काम हे ,,,
मायावती टेटकी कस बदलिस ,,
लोटा धरिस औ मुलायम नहक दिस ,,
सी बी आयी ,ले पोटा काम्पिस
संसद भीतरी कुकुर कटैया,,
अस माते कुहूराम हे ,,
हाँथ हा सबो के कालर तिरत ,,
कमल के लग गिस काम हे ,,,
मायावती टेटकी कस बदलिस ,,
लोटा धरिस औ मुलायम नहक दिस ,,
सी बी आयी ,ले पोटा काम्पिस
ता ऍफ़ डी आई ला सलाम हे ,,,,,,
लोकतंत्र के मंदिर भीतरी ,,
गाडा भर भगवान हे ,,
सबो करत ,, जनता के चिंता ,,
फेर पब्लिक काबर परेशान हे ,,,
अपन सरकार में हहो किथे ,,
विपक्छी बने माँ नै लो किथे ,,,
काला चुनबे ,,सबो पलटिया ,,
सिरतोन भारत महान हे ,,,,,,,???
अनुभव
लोकतंत्र के मंदिर भीतरी ,,
गाडा भर भगवान हे ,,
सबो करत ,, जनता के चिंता ,,
फेर पब्लिक काबर परेशान हे ,,,
अपन सरकार में हहो किथे ,,
विपक्छी बने माँ नै लो किथे ,,,
काला चुनबे ,,सबो पलटिया ,,
सिरतोन भारत महान हे ,,,,,,,???
अनुभव
शनिवार, 9 जून 2012
शनिवार, 26 मई 2012
रुपिया वाले नंगरा ,,,,,,,,,
डालर के पहिन के चड्डी अउ बनियाईन ,,
रुपिया वाले मन नंगरा होगे ,,
देश माँ महंगी औ ,, बाहिर माँ सस्ती ,,
निपोर कंडीशन ,,अलकरहा होगे ,,
मनमोहन कका ता अर्थशास्त्र भुला गे ,,
प्रणय बबा ,,,तको कलजगरा होगे ,,
भदाक ,,,ले जब गिरिस हे रुपिया औ पैसा ,,
मने ,, देश के अर्थ व्यवस्था हा डबरा होगे ,,,,
अनुभव
डालर के पहिन के चड्डी अउ बनियाईन ,,
रुपिया वाले मन नंगरा होगे ,,
देश माँ महंगी औ ,, बाहिर माँ सस्ती ,,
निपोर कंडीशन ,,अलकरहा होगे ,,
मनमोहन कका ता अर्थशास्त्र भुला गे ,,
प्रणय बबा ,,,तको कलजगरा होगे ,,
भदाक ,,,ले जब गिरिस हे रुपिया औ पैसा ,,
मने ,, देश के अर्थ व्यवस्था हा डबरा होगे ,,,,
अनुभव
शुक्रवार, 18 मई 2012
सोमवार, 23 अप्रैल 2012
खखोल ले संचेती,,,,,छत्तीसगढ़ ला
आ संचेती खखोल ले गा ,,
इन्हा सब बाजार माँ बिकथे रे ,,
राजा ,,मंत्री ,,सब करथे धंधा ,,
औ घर भीतरी आगि मुतथे रे ,,,
दाई महतारी के सांटी बिकथे ,,
बिकत हे बाप ददा के खेत खार ,,
भाई बहिनी के मिहनत के सौदा ,,
औ मया पीरा के इन्हा ब्यापार ,,
ब्यापारी बर जेन कोयला हे ,,,
हमर लइका के ,,आंखी के काजर हे ,,
जेला महतारी अपन दूध ले आंजे हे ,,
फेर लइका के फूटे जांगर हे ,,
जेन बैठ के भुर्री तापत हे ,,
जब कोनो दाई के छाती नापत हे ,,
ऐसे बढ़िया छत्तीसगढ़इया के ,,
जिनगी माँ भाई लानत हे ,,,,
अनुभव
आ संचेती खखोल ले गा ,,
इन्हा सब बाजार माँ बिकथे रे ,,
राजा ,,मंत्री ,,सब करथे धंधा ,,
औ घर भीतरी आगि मुतथे रे ,,,
दाई महतारी के सांटी बिकथे ,,
बिकत हे बाप ददा के खेत खार ,,
भाई बहिनी के मिहनत के सौदा ,,
औ मया पीरा के इन्हा ब्यापार ,,
ब्यापारी बर जेन कोयला हे ,,,
हमर लइका के ,,आंखी के काजर हे ,,
जेला महतारी अपन दूध ले आंजे हे ,,
फेर लइका के फूटे जांगर हे ,,
जेन बैठ के भुर्री तापत हे ,,
जब कोनो दाई के छाती नापत हे ,,
ऐसे बढ़िया छत्तीसगढ़इया के ,,
जिनगी माँ भाई लानत हे ,,,,
अनुभव
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