शनिवार, 26 मई 2012

रुपिया वाले नंगरा ,,,,,,,,,

डालर के पहिन के चड्डी अउ बनियाईन ,,
रुपिया वाले मन नंगरा होगे ,,
देश माँ महंगी औ ,, बाहिर माँ सस्ती ,,
निपोर कंडीशन ,,अलकरहा होगे ,,
मनमोहन कका ता अर्थशास्त्र भुला गे ,,
प्रणय बबा ,,,तको कलजगरा होगे ,,
भदाक ,,,ले जब गिरिस हे रुपिया औ पैसा ,,
मने ,, देश के अर्थ व्यवस्था हा डबरा होगे ,,,,

अनुभव

शुक्रवार, 18 मई 2012


निर्भय होकर जीना मुश्किल ,,
कायर बन कर रहना मुश्किल ,,
इस युग के झूठे नायक से
हो के पराजित मरना मुश्किल ,,

अनुभव

सोमवार, 23 अप्रैल 2012

खखोल ले संचेती,,,,,छत्तीसगढ़ ला 

आ संचेती खखोल ले गा ,,
इन्हा सब बाजार माँ बिकथे रे ,,
राजा ,,मंत्री ,,सब करथे धंधा ,,
औ घर भीतरी आगि मुतथे रे ,,,

दाई महतारी के सांटी बिकथे ,,
बिकत हे बाप ददा के खेत खार ,,
भाई बहिनी के मिहनत के सौदा ,,
औ मया पीरा के इन्हा ब्यापार ,,

ब्यापारी बर जेन कोयला हे ,,,
हमर लइका के ,,आंखी के काजर हे ,,
जेला महतारी अपन दूध ले आंजे हे ,,
फेर लइका के फूटे जांगर हे ,,

जेन बैठ के भुर्री तापत हे ,,
जब कोनो दाई के छाती नापत हे ,,
ऐसे बढ़िया छत्तीसगढ़इया के ,,
जिनगी माँ भाई लानत हे ,,,,

अनुभव
हेरी पाटर के कका,,निर्मल बबा,,
हाग वार्ड इस्कूल ले आये हे ,,
बबा उही ला जादू दिखाथे ,,
जेन दू हजार के टिकिस कटाय हे ,,,

आज मिडिया माँ बनथे बाबा ,,,
औ बाबा चढ़ाथे ,,,,,,, चढ़ावा ,,
जेन बाबा भुलागे चढ़ावा,,,
वो हा पाखंडी हे ,,करथे दिखावा ,,

अनुभव
मालिक की ख़ुशी पे भूंकता होता ,,हिस्से की हड्डी चूसता होता ,,
इस सिस्टम में खुश रहता ,,मै गर पूंछ हिलाता कुत्ता होता ,,

अनुभव
सुराज की वेदी ,,बलि चढ़ गए ,,
दो दो बाड़ी गार्ड,,
छुट जायेंगे ,,,कलेक्टर बाबु ,,
पाएंगे अवार्ड ,,,,

अधिकारी के बदले चाहे ,,
जितने छूटे अपराधी ,,,
होनहार आईएस है वह ,,
अभी हुई है शादी ,,

कलेक्टर की बीवी के आंशु से ,,
भीग गया अखबार ,,,
मुस्कुराते हुए बोले संपादक ,,
जाएगी सरकार

गार्ड मरे जो ,,,कीड़े थे वो ,,
उनका क्या परिवार ,,,
दो लाख का मुवावजा तय है ,,
जितने चाहे मार ,,,,,

मार्क्स के चेलो की भी गोली ,,
अधिकारी ,,मंत्री पहचाने ,,,
विस्फोट में उड़ गया आम सिपाही ,,
नेता बच गया देश बचाने,,,,,,,,

ग्राम सुराज या लाल सुराज ,,
अलग जरूर है बोली ,,,
पर बड़े बचेंगे माल उड़ाने
तेरे हिस्से में दर्द की गोली ,,,
अनुभव शर्मा

शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

गन्दा हे फेर धंधा हे ,,,
देश हित के चंदा हे ,,
जेन धरम के भासा बोलत हे ,,
बाबा है या भिखमंगा हे ???

रोजे एक ठन बाढ़त हे 
विज्ञापन कस भुलियारत हे ,,
अपन पेल के माया सोटत हे ,,
औ भगतन ला गीता झाड़त हे ,,

अनुभव