शनिवार, 14 मार्च 2026

मृत्यु आने न देना

हे देव,,अब मृत्यु आने न देना
जीवन रहे सदा निरंतर
कभी मृदा होकर सो जाऊ
कभी लहर उफन बह जाऊ
कभी फूल कभी तितली सा बिखरू 
कभी पतझड़ बन कर बिछ जाऊं
मुझे अहसास सा अमृत देकर
मिटा भी देना बना भी देना
मेधा देकर मानुष जना 
पर अपना अस्तित्व गंवाया मैने
अब जब फिर रच जाऊंगा
विभग,,, वृक्ष सा स्मृति लेकर
तब सबके साथ चलूंगा
निर्भीक होकर निश्चिंत होकर


सोमवार, 2 मार्च 2026

पाटा टू पाटा

इस पाटे से उस पाटे तक,,
किस्सा वही पुराना था
कहीं मेरा खंजर लाल हुआ
कही तेरा चूतड जाना था

उम्मीदों की तकरीरें थी
मै भी दादा बन जाऊंगा
संघर्षों की इस तपोभूमि में
थाने का डंडा खाना था

सोमवार, 2 फ़रवरी 2026


वो पहली मुहब्बत थी याकि पहली बियर
जरा कहिए कैसे भूल जाए
गहरे कुएं सी प्यास थी जन्मों जनम की
और तेरी भूरी बोतल ,
,पसीने से लथपथ
लंगड़ी स्टूल पर तली फल्लियों के संग पेश हुई
वो कमबख्त खट्ट का शोर 
ढक्कन उछल कर अरमानों को झकझोर गया 
मग भी छुक सदका कर बैठा,,
सुनहरी धार जैसे सोने का लहू
बुलबुले ख्वाब के माफिक क्या कन्हू 
फिर पहली चुस्की तबस्सुम सी,, होठों पे जा लगी
आय हाय,,,,,
जरा खट्टी जरा कड़वी 
हलक को खुरदुराते गुजर ली जिस तमीज से
हर जर्रा हिल गया बवाल हुआ
कभी जो मदहोशी 
हमने तो तेरी आंखों में कभी झांकी थी
आज फिर वही अहसास वही कमाल हुआ
दो मग हलाक हुए  जन्नत जमी उतर आया
तेरे जस्बातो से शख्सियत का सवाल हुआ
या तू हकीकत है ,,या वो 
खैर रहने दे ,,,तेरे जाने का गम 



शनिवार, 24 जनवरी 2026

घर लौट कर आना,,तुम्हारे करीब

मै कोलाहल और शोर छोड़ कर आया हु
दुनियावी हर मोह छोड़ कर आया हु
हर उलझन उपापोह छोड़ कर आया हु
तुम बस थोड़ा सा भात पसा लेना
कांसे की थाली पे भाजी चौलाई की
हम कौर बना बना कर खा लेंगे
यूं साथ रहा तो 


शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

प्रकाशित

मै प्रकाशित होने खातिर नहीं लिखता
मै प्रकाशित होने को लिखता हु ,,खुद से